पूजन करते वक्त रखी जाने वाली सावधानिया
प्रिय मित्रो ,
हिन्दू धर्म में पूजन का बड़ा महत्व है | रोज हम नित्य कर्म से निवृत होकर पूजा करके ही घर से बाहर निकलते है | कोई शुभ कार्य हो पूजा किये बिना संपन्न नहीं होता है | हिन्दू धर्म में ये मान्यता है की कोई व्यक्ति यदि सच्चे मन से देवी देवताओ का पूजन करता है तो उसकी मनोकामना अवश्य पूरी होती है | पूजा से ही हमें भगवान् का आशीर्वाद प्राप्त होता है | नित्य पूजा से हमारे मन की शुद्धि होती है साथ ही भगवान की आराधना करने से हमारे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ता है | और नकारात्मक ऊर्जा ख़त्म होती है |
अक्सर आपने देखा होगा की हम रोज पूजा कर रहे है फिर भी हमारे जीवन की कठिनाइयाँ दूर नहीं होती और हम निराश होते जाते है और फिर हम पूजा करना ही छोड़ देते है और भगवान् को दोष देने लगते है की वह कुछ सही तो नहीं कर रहा है हमारे जीवन में | परन्तु ऐसा नहीं होता है , पूजा करने का सही तरीका न जानने के कारण वह पूजा हमारी व्यर्थ ही जाती है यानि की हमें पूजा का उचित फल प्राप्त नहीं होता है अतः आज में आपको इस विषय के बारे में जानकारी देने के लिए उपस्थित हुई हु ताकि हमें पूजा के नियम के बारे में ज्ञात हो और हम पूजा के सही विधि के बारे में जाने |
पूजा के वक्त रखी जाने वाली सावधानिया :-
1 - घर या व्यवसाय में पूजा का स्थान हमेशा ईशान कोण ( उत्तर -पूर्व ) दिशा में ही होना चाहिए |
2 - पूजा हमेशा आसान पर बैठ कर पूर्व दिशा में मुख करके ही करनी चाहिए | और पूजा में दीपक अवश्य जलाये ( दीपक जलने का क्या महत्व है और आसान पर बैठ कर पूजा करने का क्या महत्त्व है ये तो में अपने पूर्व के ब उपयोगी जानकारियों वाले वीडियो में बता ही चुकी हु | )
3 - दो शिवलिंग की पूजा एक साथ नहीं करनी चाहिए अर्थात आपके पूजा कक्ष में दो शिवलिंग नहीं होने चाहिए | परन्तु शिवलिंग और शालिग्राम को घर में रखना शुभ माना जाता है | मित्रो में यहाँ आपको बताना चाहूंगी की कुछ लोगो ने ये भ्रान्ति फैला राखी है की शिवलिंग को घर में नहीं स्थापित करना चाहिए ये बिलकुल गलत है शिवलिंग को घर में स्थापित करने से हमें भोलेनाथ की विशेष कृपा प्राप्त होती है और यदि हम स्फटिक शिवलिंग या पारद शिवलिंग को हमारे घर में स्थापित करके उसकी रोज पूजा करे तो निश्चित रूप से हमें शिव जी का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होगा और उसके चमत्कारिक परिणाम प्राप्त होंगे )
4 - भगवान् गणपति को दूर्वा चढ़ानी चाहिए वो उन्हें शीतलता प्रदान करती है और उनको वो अति प्रिय है जबकि देवी को दूर्वा या डूब चढ़ाना निषेध है |
5 - घी का दीपक हमेशा देवताओ के दक्षिण में तथा तेल का दीपक बायीं तरफ रखना चाहिए इसी प्रकार अगरबत्ती और धुप बाए और नैवेद्य यानि प्रसाद सन्मुख रखना चाहिए |
6 - दो शालिग्राम जी , दो शंख और दो सूर्य भी पूजा में एक साथ नहीं रखने चाहिए | शालिग्राम बिना प्राणप्रतिष्ठा के भी पूजा योग्य है |
7 - यदि कोई भी मूर्ति पूजा में स्थापित करे तो उससे पहले उसकी प्राणप्रतिष्ठा करना या करवाना जरुरी है उसके बिना वो अशुद्ध मणि जाती है |
8 - तीन गणेश जी और तीन दुर्गा माँ की घर में रख कर एक साथ पूजा नहीं करनी चाहिए इससे जातक दोष का भागी बनता है | अगर आपके पास गणपति जी ज्यादा है तो आप उन्हें अपनी तिजोरी में रख दे इससे आपके धन में वृद्धि होगी और आप दोष के भागी भी नहीं बनेगे |
9 - देवताओ को कभी खंडित फल अर्पित नहीं करने चाहिए जैसे आधा केला , आधा सेव |
10 - पूजा करने के पश्चात् देसी घी का दीपक जला कर आरती अवश्य करनी चाहिए और यदि दीपक उपलब्ध नहीं हो तो केवल जल आरती भी की जा सकती है | आरती करने से पूजा में सम्पूर्णता आती है |
11 - देवताओ पर चढ़े हुए जल और पंचामृत को निर्माल्य कहा जाता है जिसे पेरो से स्पर्श नहीं करना चाहिए क्योकि इससे बहुत बड़ा पाप लगता है | इसे पीपल या तुलसी अथवा किसी पवित्र सरोवर में विसर्जित कर देना चाहिए |
हिन्दू धर्म में पूजन का बड़ा महत्व है | रोज हम नित्य कर्म से निवृत होकर पूजा करके ही घर से बाहर निकलते है | कोई शुभ कार्य हो पूजा किये बिना संपन्न नहीं होता है | हिन्दू धर्म में ये मान्यता है की कोई व्यक्ति यदि सच्चे मन से देवी देवताओ का पूजन करता है तो उसकी मनोकामना अवश्य पूरी होती है | पूजा से ही हमें भगवान् का आशीर्वाद प्राप्त होता है | नित्य पूजा से हमारे मन की शुद्धि होती है साथ ही भगवान की आराधना करने से हमारे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ता है | और नकारात्मक ऊर्जा ख़त्म होती है |
अक्सर आपने देखा होगा की हम रोज पूजा कर रहे है फिर भी हमारे जीवन की कठिनाइयाँ दूर नहीं होती और हम निराश होते जाते है और फिर हम पूजा करना ही छोड़ देते है और भगवान् को दोष देने लगते है की वह कुछ सही तो नहीं कर रहा है हमारे जीवन में | परन्तु ऐसा नहीं होता है , पूजा करने का सही तरीका न जानने के कारण वह पूजा हमारी व्यर्थ ही जाती है यानि की हमें पूजा का उचित फल प्राप्त नहीं होता है अतः आज में आपको इस विषय के बारे में जानकारी देने के लिए उपस्थित हुई हु ताकि हमें पूजा के नियम के बारे में ज्ञात हो और हम पूजा के सही विधि के बारे में जाने |
पूजा के वक्त रखी जाने वाली सावधानिया :-
1 - घर या व्यवसाय में पूजा का स्थान हमेशा ईशान कोण ( उत्तर -पूर्व ) दिशा में ही होना चाहिए |
2 - पूजा हमेशा आसान पर बैठ कर पूर्व दिशा में मुख करके ही करनी चाहिए | और पूजा में दीपक अवश्य जलाये ( दीपक जलने का क्या महत्व है और आसान पर बैठ कर पूजा करने का क्या महत्त्व है ये तो में अपने पूर्व के ब उपयोगी जानकारियों वाले वीडियो में बता ही चुकी हु | )
3 - दो शिवलिंग की पूजा एक साथ नहीं करनी चाहिए अर्थात आपके पूजा कक्ष में दो शिवलिंग नहीं होने चाहिए | परन्तु शिवलिंग और शालिग्राम को घर में रखना शुभ माना जाता है | मित्रो में यहाँ आपको बताना चाहूंगी की कुछ लोगो ने ये भ्रान्ति फैला राखी है की शिवलिंग को घर में नहीं स्थापित करना चाहिए ये बिलकुल गलत है शिवलिंग को घर में स्थापित करने से हमें भोलेनाथ की विशेष कृपा प्राप्त होती है और यदि हम स्फटिक शिवलिंग या पारद शिवलिंग को हमारे घर में स्थापित करके उसकी रोज पूजा करे तो निश्चित रूप से हमें शिव जी का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होगा और उसके चमत्कारिक परिणाम प्राप्त होंगे )
4 - भगवान् गणपति को दूर्वा चढ़ानी चाहिए वो उन्हें शीतलता प्रदान करती है और उनको वो अति प्रिय है जबकि देवी को दूर्वा या डूब चढ़ाना निषेध है |
5 - घी का दीपक हमेशा देवताओ के दक्षिण में तथा तेल का दीपक बायीं तरफ रखना चाहिए इसी प्रकार अगरबत्ती और धुप बाए और नैवेद्य यानि प्रसाद सन्मुख रखना चाहिए |
6 - दो शालिग्राम जी , दो शंख और दो सूर्य भी पूजा में एक साथ नहीं रखने चाहिए | शालिग्राम बिना प्राणप्रतिष्ठा के भी पूजा योग्य है |
7 - यदि कोई भी मूर्ति पूजा में स्थापित करे तो उससे पहले उसकी प्राणप्रतिष्ठा करना या करवाना जरुरी है उसके बिना वो अशुद्ध मणि जाती है |
8 - तीन गणेश जी और तीन दुर्गा माँ की घर में रख कर एक साथ पूजा नहीं करनी चाहिए इससे जातक दोष का भागी बनता है | अगर आपके पास गणपति जी ज्यादा है तो आप उन्हें अपनी तिजोरी में रख दे इससे आपके धन में वृद्धि होगी और आप दोष के भागी भी नहीं बनेगे |
9 - देवताओ को कभी खंडित फल अर्पित नहीं करने चाहिए जैसे आधा केला , आधा सेव |
10 - पूजा करने के पश्चात् देसी घी का दीपक जला कर आरती अवश्य करनी चाहिए और यदि दीपक उपलब्ध नहीं हो तो केवल जल आरती भी की जा सकती है | आरती करने से पूजा में सम्पूर्णता आती है |
11 - देवताओ पर चढ़े हुए जल और पंचामृत को निर्माल्य कहा जाता है जिसे पेरो से स्पर्श नहीं करना चाहिए क्योकि इससे बहुत बड़ा पाप लगता है | इसे पीपल या तुलसी अथवा किसी पवित्र सरोवर में विसर्जित कर देना चाहिए |
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